Saturday 31st of October 2026

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छत्तीसगढ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कार्तिक मास में कैसा रहे खा

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कोरबा : छत्तीसगढ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कार्तिक मास में कैसा रहे खा

छत्तीसगढ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कार्तिक मास में कैसा रहे खान-पान कैसी रहे दिनचर्या ।

कार्तिक मास में मट्ठा (छाछ) एवं दाल का न करें सेवन- डॉ.नागेन्द्र शर्मा।

कार्तिक मास में मूली एवं आंवले का सेवन हितकारी- डॉ.नागेन्द्र शर्मा।

हिंदी मासानुसार कार्तिक मास का आरंभ 27 अक्टूबर 2026 मंगलवार से हो गया हैजो 24 नवंबर 2026 मंगलवार तक रहेगा।

आयुर्वेद अनुसार प्रत्येक माह में विशेष तरह के खान-पान का वर्णन किया गया है जिसे अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं।

कोरबा( दैनिक न्यूज उड़ान) इसी विषय पर छत्तीसगढ़ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ी वैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या यानी ऋतुनुसार आहार-विहार करने की परंपरा रही है।

यह संस्कार हमें विरासत में मिला है। अभी कार्तिक मास का आरंभ 27 अक्टूबर 2026 मंगलवार से हो गया है। जो 24 नवंबर 2026 मंगलवार तक रहेगा।

इस अंतराल में हमें अपने आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना चाहिये। कार्तिक मास में बादल छट जाने से आसमान साफ एवं सूर्य चमकदार हो जाता है।

जिसके कारण आयुर्वेदानुसार पित्त दोष का प्रकोप होता है। जिससे पित्त जनित रोग, त्वचा संबंधी रोग, ज्वर, पित्तज कास रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

ऐसे में हमे पित्त शामक खाद्य पदार्थों स्निग्ध, मधुर तथा तिक्त रस वाले, हल्के, पौष्टिक और लंबे समय तक ऊर्जा बनाये रखने वाले गुणों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिये।

पित्त वर्धक खाद्य पदार्थों एवं कड़वे, कसैले रस युक्त आहार से परहेज करना चाहिये। इस माह में मट्ठा (छाछ) का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिये इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

इस माह में दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिये। कार्तिक मास में मूली एवं आंवले का सेवन हितकारी होगा। कार्तिक मास में जिमीकंद का सेवन अवश्य करना चाहिये।

इस विषय मे एक लोकोक्ति है जो दीपावली त्योहार से जुड़ी है। कार्तिक मास में ही दीपावली का त्योहार भी मनाया जाता है ।

जिसमें कहावत हैं की दीपावली में जिमीकंद का सेवन न करने वाला अगले जन्म में छुछूंदर होता है। कार्तिक मास में रसायन के रूप मे च्यवनप्राश का तथा हरीतकी का सममात्रा में शर्करा के साथ सेवन करना चाहिये।

क्या खायें- विशेष रूप से मूली एवं आंवले का सेवन हितकारी।

मधुर, तिक्त, कषाय रस युक्त भोज्य पदार्थों का, कद्दू, परवल, लौकी, नारियल का तेल, देशी गाय का घृत, माखन, दूध, देशी मिश्री, खांड। मुरब्बा, गुलकन्द, मुनक्का, किशमिश, च्यवनप्राश, जिमीकन्द का सेवन करे।

इनसे करें परहेज- विशेष रूप से मट्ठा एवं दाल का सेवन न करें। अम्ल, लवण एवं कटु रस युक्त भोज्य पदार्थों से एवं ज्यादा तेल मिर्च मसाले वाले भोज्य पदार्थों के सेवन से, बैंगन, काचरा, ककड़ी, पपीता, तरबूज, खरबुजा, लौंग, इमली, रिफाइन तेल, वनस्पति घी, पनीर, बासी भोजन, अचार से बनायें दूरी।

जीवनशैली- इस माह में धूप,ओस, और पूर्वी हवाओं से, दिन में शयन करने से, भूख लगे बिना भोजन करने से एवं अधिक व्यायाम से बचाव करना चाहिये।

कार्तिक मे न दाल खाना, न मही, दिन मे सोना भी नहीं ।

आंवला और मूली खाना, जल्दी सोना व उठना ही सही।

फोटो- नाड़ी वैद्य डॉनागेन्द्र नारायण शर्मा।

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