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: सरोज पाण्डेय का कोरबा से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं, हम तो यहीं के हैं।

Vivek Sahu

Sun, Apr 28, 2024
कोरबा (न्यूज उड़ान )छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भाजपा प्रत्याशी सुश्री सरोज पाण्डेय के द्वारा उन्हें सक्ती का निवासी और बाहरी बताने के बयान पर पलटवार कर कहा है कि हमें बाहरी बताने वाली सरोज पाण्डेय पहले यह बताएं कि कोरबा से उनका क्या रिश्ता है? उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरबा लोकसभा पूर्व में अविभाजित जांजगीर लोकसभा का हिस्सा हुआ करता था और उससे पृथक होकर कोरबा लोकसभा तथा कांग्रेस की प्रदेश सरकार में सक्ती पृथक जिला का गठन हुआ है।   अविभाजित जांजगीर लोकसभा के समय से मैं और मेरा पूरा परिवार क्षेत्रवासियों की सेवा करते आएं हैं और कोरबा संसदीय क्षेत्र की जनता का स्नेह व आशीर्वाद हमेशा से रहा है।   डॉ. महंत ने कहा कि सरोज पाण्डेय अपना दुर्ग जिला छोडक़र कोरबा में चुनाव लडऩे आई हैं तो उन्हें यह पहले बताना चाहिए कि कोरबा से उनका रिश्ता क्या है?   वे तो नजदीक की बात क्या करें, दूर-दूर तक उनका न तो कोरबा और न ही कोरबावासियों से कभी कोई नाता रहा है, वे यहां सिर्फ और सिर्फ चुनाव लडऩे के मकसद से आईं हैं और वे जान रही हैं कि कोरबा में भी उनकी दाल नहीं गलने वाली, इसलिए जनता को अनर्गल बातों से गुमराह करने का काम कर रही हैं। डॉ. महंत ने कहा कि मेरी धर्मपत्नी ज्योत्सना महंत कुशल गृहणी होने के साथ-साथ कुशल राजनीतिज्ञ भी है और जनता के बीच शांत, सौम्य स्वभाव के लिए जानी जाती है। रही बात कोरबा जिले के विकास की तो हमने अपने कर्यकाल में पूरी इच्छाशक्ति के साथ कोरबा के विकास के लिए कार्य किया है। जवाब तो सरोज पाण्डेय को देना चाहिए कि 15 साल तक भाजपा की सरकार छत्तीसगढ़ में रही और अभी 10 साल से केन्द्र में भी भाजपा की सरकार है तो अपने शासनकाल में इन्होंने कोरबा के विकास के लिए क्या किया? सरोज पाण्डेय भी स्वयं केन्द्र सरकार की ओर से कोरबा की पालक सांसद रहीं, लेकिन उन्होंने कोरबा के विकास के लिए क्या किया? यदि इन्होंने कार्य किए होते तो जितनी समस्याएं सरोज पाण्डेय बता रही हैं, वे नहीं होती। दरअसल, भाजपा की नीयत कोरबा की नैसर्गिक संपदा पर बिगडऩे लगी है।   यहां की अकूत खनिज संपदाओं के बेतहाशा दोहन की वे रणनीति बना रहे हैं। राहुल गांधी ने देश भर में मोहब्बत की दुकान खोली है और कांग्रेस नफरत का जवाब मोहब्बत से देना जानती है, किसी के व्यक्तित्व का प्रतिबिंब बताने की जरूरत सरोज पाण्डेय को नहीं है।   कोरबा में अपनी जमीन खिसकती देख वे बौखलाई हुई हैं और कुछ भी बयान दे रही हैं, जिससे उन्हें बचना चाहिए।

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