जम्मू/राजौरी : राजौरी में कथित भूमि हड़पने का बड़ा मामला? बेला बस स्टैंड, करोड़ों की परियोजना और बाढ़ के बाद उठे गंभीर सवाल।
Vivek Sahu
Tue, Jul 28, 2026
राजौरी में कथित भूमि हड़पने का बड़ा मामला? बेला बस स्टैंड, करोड़ों की परियोजना और बाढ़ के बाद उठे गंभीर सवाल।
परिवार ने CBI/ACB/SIT जांच की मांग की।
2019 से अदालत में लड़ाई, बाढ़ में बह गई विवादित भूमि, परिवार का दावा—धमकियां मिलीं, प्रताड़ित किया गया, आवाज दबाने की कोशिश हुई
भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों संपत्ति हो जब्त
जम्मू/राजौरी / दैनिक न्यूज उड़ान
जम्मू संभाग के अंतर्गत राजौरी के बेला क्षेत्र में बने बेला बस स्टैंड और बेला कॉलोनी परियोजना को लेकर एक स्थानीय परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालिया विनाशकारी बाढ़ के बाद परिवार ने पूरे मामले की CBI, ACB अथवा SIT द्वारा आपराधिक एवं प्रशासनिक जांच कराने की मांग करते हुए दावा किया है कि उनकी पुश्तैनी (मलकाना) भूमि पर कथित रूप से जबरन कब्जा कर करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना खड़ी की गई।
परिवार का कहना है कि जिस भूमि पर बेला बस स्टैंड बनाया गया, वह उनकी विरासती संपत्ति थी और वे वर्ष 2019 से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
परिवार के अनुसार, मामला पहले जिला न्यायालय राजौरी और बाद में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां कार्यवाही अब भी जारी है।
"न नोटिस मिला, न हमारी बात सुनी गई"
परिवार का आरोप है कि बस स्टैंड निर्माण से पहले उन्हें कोई वैधानिक नोटिस नहीं दिया गया और उनकी आपत्तियों को दरकिनार कर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया।
उनका दावा है कि विरोध करने पर उन्हें प्रशासनिक दबाव, कथित धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
परिवार का कहना है कि वर्षों तक उन्हें चुप रहने के लिए दबाव बनाया गया, बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगवाए गए और न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।
राजस्व रिकॉर्ड पर भी सवाल
परिवार का आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा भूमि की चार अलग-अलग निशानदेहियां की गईं और हर बार अलग-अलग परिणाम सामने आए।
उनके अनुसार, इससे पूरे भूमि रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
परिवार का कहना है कि उनके पास इन सभी निशानदेहियों, राजस्व दस्तावेजों और न्यायालयी रिकॉर्ड की प्रतियां मौजूद हैं।
"धमकियां, दबाव और कथित रिश्वत की मांग"
परिवार ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपनी भूमि को लेकर आवाज उठाई तो उन्हें कथित रूप से बार-बार परेशान किया गया।
उनका दावा है कि उन्हें और उनके परिवार को डराया-धमकाया गया तथा कथित रूप से धन की मांग भी की गई।
परिवार का कहना है कि इन आरोपों के समर्थन में उनके पास दस्तावेज, रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वे जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
किन अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग?
परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले में उस समय से जुड़े और वर्तमान अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो।
परिवार ने विशेष रूप से नगर परिषद राजौरी के वर्तमान एवं तत्कालीन ईओ, संबंधित तहसीलदार, पटवारी, गिरदावर, राजस्व विभाग तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।
परिवार का आरोप है कि इन अधिकारियों ने उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं की और उन्हें कई वर्षों तक कथित रूप से परेशान किया।
बाढ़ ने बढ़ाए सवाल
परिवार का कहना है कि हालिया फ्लैश फ्लड ने केवल उनकी पुश्तैनी भूमि ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना बेला बस स्टैंड को भी भारी नुकसान पहुंचाया।
उनका सवाल है कि यदि यह क्षेत्र पहले से बाढ़ संभावित था, तो यहां इतनी बड़ी परियोजना कैसे स्वीकृत हुई और आसपास दुकानों व व्यावसायिक भवनों के निर्माण की अनुमति किन आधारों पर दी गई।
₹50 लाख से अधिक का व्यक्तिगत नुकसान होने का दावा
परिवार के अनुसार, उन्होंने पिछले कई वर्षों में कानूनी लड़ाई, दस्तावेजी प्रक्रिया और अन्य प्रयासों पर लगभग ₹40–45 लाख खर्च किए। इसके अतिरिक्त उनकी भूमि पर बने लगभग 20 अस्थायी शेड, जिन पर लगभग ₹10 लाख का निवेश किया गया था, बाढ़ में बह गए।
जांच में किन बिंदुओं को शामिल करने की मांग परिवार ने मांग की है कि जांच एजेंसी निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करे—
बेला बस स्टैंड परियोजना की स्वीकृति और वास्तविक लागत। भूमि स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड।
निर्माण की तकनीकी एवं पर्यावरणीय मंजूरियां। एनओसी, भवन नक्शों और निर्माण स्वीकृतियों की वैधता। संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका।
यदि किसी स्तर पर पद के दुरुपयोग, अनियमितता या कानून के उल्लंघन के आरोप सही पाए जाएं, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई। "सच सामने आए, यही हमारी मांग"
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना है ताकि यदि किसी स्तर पर कानून का उल्लंघन या प्रशासनिक लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय हो सके और प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।
रिपोर्टर .....अनिल भारद्वाज
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